देहरादून/हल्द्वानी।
उत्तराखंड में हाई रिटर्न का दावा करने वाली निवेश योजनाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ दिन पहले हल्द्वानी में आयोजित कथित एआई आधारित निवेश कंपनियों जीएमएफएक्स, मेटा ट्रेड और मेटा वेल के कार्यक्रमों में निवेशकों की घटती भागीदारी और बढ़ती चिंताओं की खबर सामने आई थी। अब देहरादून में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई ने ऐसे निवेश मॉडलों को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया है।
ईडी के देहरादून उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुचर्चित BTCFUND.IS बिटकॉइन निवेश मामले में आरोपी हेमंत ईश्वर शर्मा की लगभग 8.54 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। कुर्क संपत्तियों में राजपुर क्षेत्र स्थित आलीशान बंगला, बीएमडब्ल्यू कारें और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम और बिटकॉइन का उपयोग रियल एस्टेट, लग्जरी वाहनों और आलीशान जीवनशैली पर किया गया।
इधर, हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित एक होटल में हाल ही में आयोजित जीएमएफएक्स, मेटा ट्रेड और मेटा वेल से जुड़े निवेशकों के कार्यक्रम में अपेक्षा से काफी कम लोग पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, पहले जहां नए निवेशकों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा था, वहीं अब अधिकांश निवेशक अपने निवेश की वापसी और भुगतान में हो रही देरी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि ऐसी कई हाई रिटर्न योजनाओं का कार्य करने का तरीका लगभग समान होता है। शुरुआत में कम समय में अधिक मुनाफे का वादा किया जाता है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और ऑनलाइन बैठकों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है। कुछ निवेशकों को शुरुआती भुगतान कर भरोसा बनाया जाता है, लेकिन नए निवेश की रफ्तार कम होने पर भुगतान में देरी, तकनीकी कारण या नई नीतियों का हवाला दिया जाने लगता है।
ईडी के अनुसार, वर्ष 2014 से 2018 के बीच संचालित कथित बिटकॉइन निवेश योजना के माध्यम से बड़ी मात्रा में क्रिप्टो संपत्ति जुटाई गई। ब्लॉकचेन विश्लेषण में लगभग 856.23 बिटकॉइन, जिनकी वर्तमान अनुमानित कीमत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई है, को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिन्हित किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के पास आय का कोई वैध स्रोत नहीं था, जबकि उसने करोड़ों रुपये की संपत्तियां और लग्जरी वाहन खरीदे। इससे पहले भी उसकी 4.56 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में एआई, क्रिप्टोकरेंसी, ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल इनकम के नाम पर निवेश योजनाओं का तेजी से प्रचार हुआ है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले कंपनी का पंजीकरण, नियामकीय स्थिति, व्यवसाय मॉडल और कानूनी वैधता की पूरी जांच अवश्य करनी चाहिए।
ईडी की कार्रवाई और निवेशकों के बीच बढ़ती आशंकाएं इस बात का संकेत हैं कि असामान्य और अत्यधिक रिटर्न का दावा करने वाली किसी भी निवेश योजना में बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
